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ई कॉमर्स से प्राप्त डेटा साझा करने के सरकार द्वारा उपभोक्ताओं की अनिवार्य सहमति पर कैट ने किया सरकार का समर्थन

By Rajdhani News Nov 6, 2022

जमशेदपुर 6 नवम्बर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के उस कदम का स्वागत किया है, जिसमें ई-कॉमर्स कंपनियों को डेटा को साझा करने से पहले उपभोक्ताओं की सहमति प्राप्त करने के लिए एक अनिवार्य नियम बनाया जा रहा है। “इस तरह का नियम निश्चित रूप से डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार का एक सुधारात्मक कदम होगा। यह कहते हुए कैट के राष्ट्रीय सचिव सुरेश सोन्थालिया , ने कहा की यह ध्यान दिया जाना जरूरी है कि पिछले कई वर्षों से, कैट ई-कॉमर्स कंपनियों पर उनके कुकर्मों की जांच के लिए कुछ प्रतिबंधों की मांग कर रहा है।डाटा की चोरी को रोका जाना बहुत ही ज़रूरी है ।

सोन्थालिया ने केंद्रीय वाणिज्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री श्री पीयूष गोयल की प्रशंसा करते हुए ई-कॉमर्स और ई-कॉमर्स पालिसी तथा संबंधित उपभोक्ता सुरक्षा नियम लागू करने का जोरदार आग्रह किया है जो पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से लंबित है और जिसके अभाव में विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियां खुले तौर पर एफडीआई नीति, फेमा और अन्य संबंधित नियमों और विनियमों का उल्लंघन कर रही हैं जो भारत के खुदरा व्यापार को बहुत नुकसान पहुंचा रही हैं।

हम उपयोगकर्ता की गोपनीयता की रक्षा करने और सूचना के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना करते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि देश के डेटा को किसी भी रूप में भारत के भीतर संग्रहीत करने में सक्षम बनाने के लिए एक व्यापक और मजबूत डेटा गोपनीयता नीति जारी करने की भी आवश्यकता है।

एमेजॉन द्वारा अपैरियो को डीलिस्ट करने पर सोन्थालिया ने कहा कि पहले एमेजॉन ने क्लाउडटेल को डीलिस्ट किया था और अब अपैरियो को। यह इस बात पर हमारे रुख की पुष्टि करता है कि कैसे अमेज़ॅन फेमा/एफडीआई नीति का खुले तौर पर उल्लंघन कर रहा है और छोटे व्यापारियों/किराना की आजीविका को नुकसान पहुंचा रहा है। यह प्रवर्तन निदेशालय, सीसीआई और डीपीआईआईटी और अन्य सरकारी एजेंसियों के लिए एक जागृत कॉल है। यह विदेशी कंपनी का एक भयावह खेल है कि वह अपने लाभ के लिए भारतीय कंपनियों का अधिकतम उपयोग करे और एक बार जब यह मुद्दा सार्वजनिक चर्चा में आता है, तब उसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है॥ यह सीधे तौर पर एफडीआई नियमों का उल्लंघन है। अब, समय आ गया है जब भारत में ई-कॉमर्स व्यवसाय के लिए मजबूत और सख्त नियम होने चाहिए और भारत में ई-कॉमर्स व्यापार की निगरानी और विनियमन के लिए ट्राई या सेबी की तर्ज पर एक अधिकार प्राप्त नियामक प्राधिकरण का गठन होना चाहिए।

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