अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) तदनुसार 14 मई 2021 पर विशेष

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आज 14 मई 2021 के दिन विक्रम संवत के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया है । इसे अक्षय तृतीया के नाम से हम सभी जानते हैं । आखा तीज भी कहा जाता है । इस शुभ दिन में किया हुआ कार्य अत्यंत ही शुभ होता है । विवाह हेतु यह सबसे उत्तम मुहूर्त कहा जाता है ।

भगवान परशुराम का जन्मदिन भी आज के दिन ही है । आदि शंकराचार्य का जन्म दिन भी आज ही है । त्रेता युग की यह आदि तिथि है । इसी शुभ दिवस में त्रेता युग प्रारंभ हुआ था ।

आज के दिन गंगा स्नान का बड़ा ही महत्व है । मैंने गंगा जी पर एक लेख लिखा था । आज यहां इस शुभ दिवस पर प्रस्तुत कर रहे हैं ।

त्रेता युग की आदि तिथि है वैशाख शुक्ल तृतीया 

त्रेता युग की आदि तिथि है वैशाख शुक्ल तृतीया । गंगा स्नान के महात्म्य में जो श्रेष्ठ तिथियां बताई गई है उनमें से एक है यह तिथि । इसी तिथि से त्रेता युग प्रारंभ हुआ था । इस दिन गंगा के जल में स्नान करके श्राद्ध तथा दान आदि करने से पितरों को संतृप्त करने से मनुष्य पुनर्जन्म का भागी नहीं होता ।

आज भक्तजन चाह कर भी गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त नहीं कर सकते । गोमुख से निकलने वाली भागीरथी गंगा की संपूर्ण जल राशि को सरकार ने टिहरी बांध बनाकर अवरुद्ध कर दिया है । गंगा का एक बूंद भी भक्त जनों को नहीं मिल रहा है । साथ ही कारखानों का प्रदूषित एवं विषैला अवशिष्ट द्रव्य तथा नगरों के सीवर गंगा एवं गंगा की सहायक नदियों में डाले जा रहे हैं । फलस्वरुप गंगा का जल प्रदूषित हो गया है ।

पर्यावरण विशेषज्ञ एवं गंगा एक्शन प्लान के सूत्रधार प्रो० बी० डी० त्रिपाठी ने सरकार की अदूरदर्शिता को उजागर करते हुए कहा कि जिन लोगों ने कभी गंगा को देखा नहीं, ऐसे आश्रित जीवी सरकार की नजर में वैज्ञानिक हैं, विशेषज्ञ हैं । प्रख्यात भू – वैज्ञानिक प्रो० टी० शिवाजी राव के अनुसार टिहरी बांध सिर्फ एक बांध न होकर विभीषिका उत्पन्न करने वाला एक टाइम बम है ।

गंगा के बिना हालात इतने बिगड़ जाएंगे कि भारत की एक तिहाई आबादी जल के बिना ही काल-कवलित हो जाएगी । भारत की आधी भूमि बंजर होगी । अनाज का एक दाना भी उक्त भूमि में नहीं उग सकेगा ।

आश्चर्य होता है समाज के विभिन्न तबके के लोगों पर जो एक तरफ तो लाखों रुपया खर्च करते हैं पुण्य कमाने के ध्येय से और दूसरी ओर अपनी मां गंगा को कैद में देखकर भी आंखें मूंदे हैं और पाप का भागी बन रहे हैं ।

 

लेखक — धर्म चन्द्र पोद्दार