क्या आप भी हो रहे हैं अष्टमी और नवमी तिथि में Confuse, तो ज़रूर पढ़ लें ये खबर

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शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार साल में पड़ने वाले 4 नवरात्रि शुभ व लाभदायक होते हैं। पूरे नौ दिन तक देवी दुर्गा की आराधना का ये पर्व न केवल देश में बल्कि अन्य देशों में भी मनाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूरे 9 दिन तक देवी दुर्गा के व्रत-उपवास करते हैं। जिनके समापन के साथ अष्टमी और नवमी के दिन विधि वत कन्या पूजन किया जाता है।

परंतु लगभग लोग इस बात को लेकर अजमंजस में पड़े दिखाई देते हैं। बता दें इस बार के शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से लेकर 25 अक्टूबर तक चलेंगे। तो वहीं 25 अक्टूबर को दशहरे का पर्व मनाया जाएगा। यही मुख्य कारण है कि अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर लगभग लोग दुविधा में है। तो चलिए आप इस दुविधा को दूर कर देते हैं।

पंचांग के अनुसार सर्योदय-व्यापिनी आश्विन शुक्ल अष्टमी को श्रीदुर्गाष्टमी अथवा महाष्टमी के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है यह अष्टमी सूर्योदय बाद कम से कम 1 घटी व्यापिनी तथा नवमी तिथि से युक्त होनी चाहिए। सप्तमीयुता अष्टमी को सर्वथा त्याग देना चाहिए। परंतु अगर अष्टमी पहले दिन सप्तमी युक्त हो तथा दूसरे गिन एक घड़ी भी कम हो, तब इसे सप्तमीयुता भी स्वीकार लेना चाहिए।

अथ महाष्टमीघटिकामात्राप्यौदयिकी नवमी युता ग्राह्मा।।सपत्मी स्वल्पयुता सर्वथा त्याज्या।यदा तु पूर्वत्र सप्तमीयुता परत्रोदये नास्तिघटिका न्यूना वा वर्तते तदा पूर्वा सप्तमीविद्धापि ग्राह्मा।।

अपरोक्त शास्त्रनियम या शास्त्र श्लोक के अनुसार श्री दुर्गाष्टमी व्रत (महाष्ट्मी) सप्तमीयुता अष्टमी ( 23 अक्टूबर, 2020 ई.) में मनाना शास्त्र-सम्मत होगा। इसके अलावा बताया जा रहा है इस वर्ष आश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि 24 अक्टूूर, 2020 ई. को 1 घड़ी से भी कम है। परंतु जहां पंजाब से पूर्व प्रदेशों में 24 अक्टूबर, 2020 ई. को अष्टमी तिथि 1 घड़ी से अधिक ( सूर्योदय बाद) व्यापत होगी। अर्थात जहां सूर्योदय प्रातः 6 घंटे 35 मिनट या इससे पहले होगा, वहीं दुर्गाष्टमी (महाष्टमी) 24 अक्टूबर को ही ग्राह्मा होगा।

बता दें पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पश्चिमीह हि.प्र., गुजरात, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों में दुर्गाष्टमी 23 अक्टूबर, 2020 ईं. को ही होगी। जबकि शेष भारत (दिल्ली, हरियाण, उ.प्र. पूर्वी राजस्थान , मध्य-पूर्वी महाराष्ट्र तथा समस्त पूर्वी भारत) में यह पर्व, व्रत 24 अक्टूबर, 2020 ई. को मनाई जाएगी। आचार्य राज किशोर ने कहा कि नवरात्रों के बाद मां की मूर्ति के विसर्जन का समय सोमवार 26 अक्तूबर को सुबह 6.29 से लेकर 8.43 बजे तक होगा।