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लातेहार जिला में हाल सर्वे में भारी गड़बड़ी के कारण लोगों को हो रही है परेशान। सरकार नहीं करा रही है रि सर्वे ( भाग 1)

लातेहार जिला में हाल सर्वे में भारी गड़बड़ी के कारण लोगों को हो रही है परेशान। सरकार नहीं करा रही है रिसर्वे।

 

मोहम्मद शहजाद आलम।

लातेहार जिले में हाल सर्वे में गड़बड़ी से लोगों को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोग इसे लेकर खासा परेशान हैं। अक्सर लोग आपस में उलझ कर मारपीट कर ले रहे हैं। अगर इसमें सुधार नहीं किया जाता है तो खून खराबा होने की आशंका से मुंह भी नहीं मोड़ा जा सकता है। अगर क्रमवार देखा जाए तो इस सर्वे में अनेकों प्रकार की गड़बड़ियां हैं। जिसके बावजूद भी इसी हाल सर्वे के अनुसार जमीन की खरीद बिक्री मोटेशन हो रही है जबकि सरकार इस सर्वे को गलत मान चुकी है उसके बावजूद भी सरकार में बैठे आला अधिकारी सरकार की बातों की अवहेलना करते हुए हाल सर्वे से ही जमीन की खरीद बिक्री करा रहे हैं जो कि बिल्कुल ग़लत और नाजायज है। और सरकार भी मूकदर्शक बने बैठकर देख रही है।

 

 

1– 1978 में जो सर्वे हुआ इसे ही लागू किया गया है। और खतियान नक्शा सभी का 1992 में वितरण किया गया है।

 

2– तत्कालीन उपायुक्त कमल किशोर सोन के द्वारा गत 25-8-2006 को इसे लागू कर दिया गया जबकि इसकी गड़बड़ी को लेकर बैठक में जानकारी दी गई थी। जिसका उदाहरण यह है कि चंदवा अंचल के संबंध में चंदवा के हल्का कर्मचारी के द्वारा बताया गया कि कैसर ए हिंद भूमि जिस पर सरकारी भवन अवस्थित है का खाता नया सर्वे खतियान में निजी व्यक्तियों के नाम पर खोल दिया गया है अनुमंडल पदाधिकारी लातेहार के द्वारा बताया गया कि चंदवा बाजार का भी खाता है रैयतों के नाम से नए सर्वे में खोल दिया गया है। इस संबंध में उपायुक्त लातेहार के द्वारा प्रभारी पदाधिकारी बंदोबस्त को निर्देशित किया गया कि इस कार्य से संबंधित दोषी पदाधिकारी को चिन्हित कर अग्रसर कार्रवाई करें। और हाल सर्वे खतियान छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 87 के अंतर्गत निष्पादित वादों के संबंध में कोई प्रविष्टि किसी पदाधिकारी या कर्मचारी के द्वारा खतियान में नहीं की जाएगी। एवं सभी कार्यवाही पंजी टू के माध्यम से होगी। गलत ढंग से इंद्राज करने वाले पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिसके बाद उपायुक्त के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन कर बैठक की कार्रवाई समाप्त की गई थी। इसके अलावा भी अन्य बातें बैठक की कार्यवाही पंजी में भी अंकित है।

 

3– 1992 में खतियान बाटा गया जबकि इतना समय के अंतराल 2006 में इसे लागू किया गया जोकि समझ के परे की बात है।

4–हाल सर्वे की गड़बड़ी से जनताओं के परेशानी के साथ-साथ राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण वित्तीय घाटा भी हो रही है। मुआवजा भुगतान से सरकार को राजस्व की नुकसान हो रही है। उदाहरण के लिए जिसका पुराना में 10 डिसमिल है उसका अगर नया में 20 डिसमिल चढ़ा हुआ है या ऑनलाइन खतियान बन गया है और रसीद कट रही हो वैसे में सरकार को 20 डिसमिल का मुआवजा देना पड़ रहा है। इस प्रकार से अगर देखा जाए तो सरकार इस सर्वे के बाद वित्तीय घाटा भी झेल रही है।

 

5—दूसरा पहलू यह है।सी एस खतियान से जो भूमि वर्षों पूर्व बिक्री कर दी गई है। और वह भूमि आज नया सर्वे में बिक्रीकर्ता के नाम से ही खाता खतियान बना हुआ है जिस का गलत फायदा उठाकर धड़ल्ले से इन भूमि को दोबारा निबंधन कार्यालय में बिक्री किया जा रहा है एवं सरकार राजस्व की प्राप्ति कर रही है। कहीं सरकार को घाटा और कहीं सरकार को राजस्व की प्राप्ति यह दोनों तरह की गड़बड़ियां इस सर्वे में देखने को मिल रही है।

 

6—यह भी बात सामने आई है किस सरकार के द्वारा तत्क्षण सर्वे कराने हेतु आर्थिक अभाव है। अर्थात बजट का कमी है। अगर आर्थिक अभाव है उस परिस्थिति में सरकार को चाहिए कि पूर्व की भांति पुराना मांग पंजी टू को सम्मान देकर भू लगान रसीद निर्गत करने की पुनः व्यवस्था की जाए। ताकि जब सरकार के पास सर्वे कराने हेतु आर्थिक स्थिति में सुधार हो जाए तब सर्वे कराकर उसे लागू करें।

लातेहार जिला के संपूर्ण अंचलों में आदिवासी आदिम जनजाति एवं अनुसूचित जाति के लोग निवास करते हैं जिसके पास जाति वर्गों के मुताबिक सोचने समझने शिक्षा का स्तर बिल्कुल ही निम्न है। इस परिस्थिति में हाल सर्वे से उत्पन्न गड़बड़ियों से इनके बीच विशेषकर विवाद बढ़ेगा एवं आपस में मारकाट की नौबत आ जाएगी और वह इससे जीवन लीला अपना समाप्त करे लेंगे इसके परिवार विकास की ओर नहीं जा कर यह चौपट हो जाएंगी। सबसे अहम बात तो यह है कि कि केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार इनके संरक्षण व विकास के लिए नाना प्रकार के विकासात्मक योजनाएं चला रही है दूसरी ओर राज्य सरकार के द्वारा हाल सर्वे को लागू कर इनका चौतरफा विकास नहीं विनाश का रास्ता खोल दिया है। जो लातेहार जिला में देखने को मिल रहा है। इससे ऐसा प्रतीत होता है की यह सरकार विनाश का लीला देखना चाह रही है।

 

7—लातेहार जिला के साथ-साथ लोहरदगा जिला में भी हाल सर्वे आर एस को आज असंवैधानिक प्रक्रिया के तहत लागू किया गया है जिसका बुरा खामियाजा सिर्फ जनता और जनता को ही झेलना पड़ रहा है और राज्य सरकार कैबिनेट से हाल सर्वे को गलत करार दे दिया है जिसके बावजूद भी हाल सर्वे को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाई रही है।

 

8—ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि लातेहार सदर अंचल के कई गांव का आज भी गत सर्वे खतियान अर्थात सीएस से भू लगान रसीद निर्मित की जा रही है। इस तरह से देखा जाए तो एक ही जिला में दो अलग-अलग नियम से भू लगान रसीद रसीद निर्गत किया जा रहा है। जो कि एक चिंता का विषय है।

 

9–मांडर विधायक माननीय श्री बंधु तिर्की के द्वारा विधानसभा में इसे लेकर सरकार से सवाल किया गया था की क्या यह बात सही है कि लातेहार जिला के रिविजनल सर्वे का प्रकाशन CNT ACT 1908 की धारा 84 (2) के तहत वर्ष 2005 में किया गया जिसके आधार पर भूमि संबंधी संपूर्ण किए कार्य किया जा रहा है। वही दूसरा प्रश्न किया गया था की क्या यह बात सही है DILMP के तहत हाल सर्वे के अनुसार भू अभिलेखों का DIGILIZ कराकर जिले के सभी भूमि संबंधी कार्य हो रहा है परंतु रिविजनल सर्वे में अनेकों त्रुटियां विद्यमान रहने के कारण विवादों एवं भू समस्याएं व्याप्त है। यदि उपयुक्त खंडों के उत्तर स्वीकारात्मक हैं तो क्या सरकार राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की अधिसूचना संख्या -438 नि0 रा0 दिनांक 31-10-2019 के द्वारा रिविजनल सर्वे त्रुटि पूर्ण होने के कारण लातेहार जिला के अंतिम प्रकाशित सातों अंचलों के राजस्व ग्रामीणों का छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1902 की धारा -98 के तहत निहित प्रावधान के आलोक में पूर्ण भू सर्वेक्षण (रिसर्वे) का कार्य प्रारंभ करने पर विचार रखती है हां यदि तो कब तक नहीं तो क्यों। ऊपर अंकित दो प्रश्न श्री बंधु तिर्की के द्वारा विधानसभा में की गई थी जिसे प्रभारी मंत्री राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग झारखंड रांची के द्वारा स्वीकार किया गया था। जिसके बावजूद भी अभी तक सर्वे का कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है। 31-10-2019 को यह बात विधानसभा में उठाई गई थी और अभी 2023 चल रहा है।

 

9— सर्वे में गड़बड़ी के कारण जिले में मुकदमों की भरमार हो गई थी और जिले में कुल 10898 मामले विभिन्न अदालतों में दायर हो गई थी। और अभी और भी ज्यादा मामले इसे लेकर दायर हुई होगी।

त्रुटिपूर्ण सर्वे को लेकर लातेहार विधायक प्रकाश राम ने गत शीतकालीन विधानसभा सत्र में 27 दिसंबर 2018 को विधानसभा की ध्यान आकर्षण समिति के समक्ष रखा था। हालांकि इससे पूर्व 7 जुलाई 2018 को भी विधायक प्रकाश राम ने झारखंड विधानसभा में जिले के कुल 772 गांव में फिर से सर्वे कराने का आग्रह किया था। जिस पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मिनी सर्वे कराने का आदेश सत्र के दौरान ही विधानसभा में कर डाला था। विधानसभा में मामला उठने के तुरंत बाद ही तत्कालीन उपायुक्त राजीव कुमार ने सरकार को प्रतिवेदन भेजा था। जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए भू राजस्व सचिव कमल किशोर सोन ने संयुक्त सचिव ए मुत्थू कुमार को लातेहार भेजकर इस मामले को पड़ताल कराई थी सरकार के इस निर्णय पर लोगों की उम्मीद जगी थी कि सर्वे को इस गड़बड़ी में सुधार की जाएगी इस बात को लेकर लातेहार जिले में काफी हर्ष देखा गया था।

 

10—– पूर्व में भी विधायक हरे कृष्ण सिंह के द्वारा त्रुटिपूर्ण सर्वे का मामला विधानसभा में उठाया गया था और लातेहार जिला में दोबारा सर्वे कराने की मांग की गई थी वहीं पूर्व विधायक और अभी के वर्तमान विधायक रामचंद्र सिंह ने भी जगह-जगह धरना प्रदर्शन कर के लातेहार जिले में त्रुटि पूर्व सर्वे को सुधारने की मांग की थी। पुनः मिनी सर्वे को लेकर वर्तमान विधायक रामचंद्र सिंह समेत 3 सदस्य कमेटी का भी गठन किया गया था। लेकिन जिसके बावजूद भी रिसर्वे का कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है।

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