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पोटका पर्यावरण चेतना केंद्र बड़ा सिगदी में संवाद रांची की ओर से दो दिवसीय पारंपरिक वेदों का ऊतप्रेरणात्मक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

पोटका प्रखंड अंतर्गत पर्यावरण चेतना केंद्र बड़ा सिगदी में संवाद रांची की ओर से दो दिवसीय पारंपरिक वेदों का ऊतप्रेरणात्मक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हुआ। जिसमें पूर्व एवं पश्चिम सिंहभूम दो जिला की चार प्रखंड के लगभग 7 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस प्रशिक्षण शिविर में स्रोत व्यक्ति के रूप में घाटशिला क्षेत्र के सुधीर कुमार सोरेन ने बताया आज के दिन जड़ी बूटी चिकित्सा पद्धति को जिंदा रखने के लिए जड़ी बूटियों की पहचान और उसके गुण एवं तैयार करने की प्रक्रिया को पुराने चिकित्सकों से सीखने एवं जानने की जरूरत है। क्योंकि प्राकृतिक जड़ी बूटियों जो है जड़, मूल, पता, एवं टहनी सारे गुणकार होते हैं, झूठा नहीं होता है। यदि हमारे जड़ी-बूटी चिकित्सा पर विश्वास हो जाए तो पुराना से पुराना बीमारियों दुर् भाग सकते हैं। उन्होंने जड़ी बूटियों के जोड़ी और आयुर्वेदिक के बारे में जानकारी दी। पर्यावरण चेतना केंद्र के निर्देशक सिद्ध सर सरदार ने कहा कि हढ़ोपाथी के विशेषता पर विस्तार से अपना विचार रखा। सुदर्शन भूमिज ने बच्चों की पोषण, दांत की सुरक्षा, और सरकी बालों के समस्या पर विस्तार से जानकारी दिया। जोड़ी की पहचान और दवा बनाने की फार्मूला का भी जानकारी दिया। दुलाल महाराणा, अर्जुन सांमाईया, रायमुनि हनहागा, मैं भी महिलाओं की बीमारियों से बचने के लिए जड़ी-बूटी चिकित्सा पद्धति का जानकारी दिया। पार्वती हांसदा, लक्ष्मी आलडा, महेंद्र समाद, ने भी अपना अभ्यास पर विचार रखा। इस प्रशिक्षण शिविर में हरि सिंह भूमिज, संगीता बीरूली, हरीश आलडा, किशोर मुनि मुर्मू, नेहा हांसदा, छोटा पूर्ति, गौरी सरदार ,आरती सरदार, चेतन माझी, दिलीप हांसदा, नाराण सिंह पूर्ति, निरसो हांसदा , आदि ने भाग ली। प्रशिक्षण के संचालन सालगे माडीॅ ने किया एवं प्रतिभागियों के स्वागत पर्यावरण चेतना केंद्र का सचिव विभीषण ने किया।

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