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पोटका के बड़ा सिगदी पर्यावरण चेतना केंद्र सभा भवन में आदिवासी भूमिज समाज के संस्कृति परंपरा रीति रिवाज पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

पोटका के बड़ा सिगदी पर्यावरण चेतना केंद्र के सभा भवन में आदिवासी भूमिज समाज के संस्कृति परंपरा रीति रिवाज पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। आदिवासी भूमिज समाज का संस्कार परंपरा पर पिछले 1986 में जुड़ी दरबार टांड़ी में हुआ था, वो सम्मेलन का रूप लिया था। उस सम्मेलन से समाज का एकीकरण हुआ तथा समाज को संचालन करने के लिए इसके परंपरा एवं रीति रिवाज का एक पारित विधि बनाया गया था। जिस के अनुरूप आज तक इस व्यवस्था चलते आया। आज 36 साल की अंतराल में देखा जा रहा है सामाजिक परंपरा व्यवस्था में युवाओं की भागीदारी नहीं है। खुशी और खुशियांली के लिए भीड़ जुटाते रहा है। बह भीड़ सांस्कृतिक परंपरा पर रीति रिवाज को आत्मसात करते हुए समाज को दिशा दे सकता है, लेकिन वैसा नहीं हो रहा है इसीलिए आदिवासी भूमिज समाज ने समाज के उन युवा पीढ़ियों को सांस्कृतिक के प्रति हमदर्दी हो सके, समाज को मजबूती प्रदान कर अहम भूमिका निभाए तथा प्राकृतिक की धरोहर को संरक्षण संवर्धन कर प्राकृतिक सहकारिता के रूप मैं पहचान बनाने में मदद करें तथा जन्म संस्कार, विवाह संस्कार ,मरण संस्कार, अपने समाज के रुड़ी व्यवस्था के अनुरूप करने में मददगार बने। इस कार्यशाला में सिद्धेश्वर सरदार ,हरिस भूमिज, जयपाल सिंह सरदार शत्रुघ्न सरदार बुद्धेश्वर सरदार पुतुल सरदार सहदेव सरदार मालती सिंह रिंकी सरदार गौरी सरदार जयंती सरदार अनिता कुमारी अर्जुन सरदार सूरेस सरदार सोनाराम सरदार अनीता सरदार आलादि सरदार सोमवारी सरदार मोकरो सिंह, मेनका भूमिज सहदेव सरदार विजय सरदार हाड़ीराम सरदार, शुक्र मणि भूमिज, भोला भूमिज, बुधु मुंडा, सनातन मुंडा आदि उपस्थित रहे

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