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केरल की रहने वाली धनबाद की ग्रामीण एसपी रिष्मा रमेशन ने की छठ पूजा, लातेहार एसपी ने सिर पर उठाया दउरा

*केरल की रहने वाली धनबाद की ग्रामीण एसपी रिष्मा रमेशन ने की छठ पूजा, लातेहार एसपी ने सिर पर उठाया दउरा*

*ज़िला ब्यूरो बब्लू खान की रिपोर्ट लातेहार *

*धनबाद :* छठ की महिमा अब पूरे भारत में फैल रही है. दक्षिण भारत के लोगों में भी छठ पूजा के प्रति आस्था उमड़ने लगी है. इस साल केरल की रहने वाली, अभी धनबाद ग्रामीण एसपी रिष्मा रमेशन भी पूरे विधि विधान से छठ पूजा कर रही हैंवहीं, उनके पति लातेहार एसपी अंजनी अंजन ने दउरा उठाया.

*लातेहार :* सूर्य की उपासना का त्योहार छठ महापर्व का क्रेज उत्तर भारत के अलावा अब देश के कोने-कोने तक पहुंचने लगा है. देश के लगभग सभी हिस्सों में अब लोग छठ करने लगे हैं. केरल की रहने वाली और वर्तमान में धनबाद की ग्रामीण एसपी रिष्मा रमेशन लातेहार में चार दिवसीय छठ महापर्व पूरी परंपरा के साथ कर रही हैं दरअसल, दक्षिण भारत के इलाके में अभी भी छठ पर्व का क्रेज उतना नहीं है, जितना उत्तर भारतीय लोगों में है. हालांकि दक्षिण भारत के लोग भी अब छठ व्रत करने लगे हैं. धनबाद की ग्रामीण एसपी रिष्मा रमेशन मूल रूप से केरल की रहने वाली हैं . उनके पति अंजनी अंजन लातेहार एसपी के रूप में पदस्थापित हैं. लातेहार स्थित एसपी आवास से ही धनबाद की ग्रामीण एसपी पूरी परंपरा के साथ छठ व्रत कर रही हैं. रविवार को 36 घंटे का निर्जला व्रत करते हुए वे अपने पूरे परिवार के साथ छठ घाट पहुंची और पूजा अर्चना की. भगवान भास्कर को पारंपरिक रीति रिवाज के साथ अर्घ्य दिया.

*पहली बार व्रत कर रही हैं ग्रामीण एसपी रिष्मा रमेशन:* धनबाद की ग्रामीण एसपी रिष्मा रमेशन ने कहा कि वह पहली बार छठ कर रही हैं. यह आस्था और विश्वास का त्योहार है. झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश में इसे करने वालों की संख्या काफी अधिक रहती है. पहली बार छठ व्रत करने पर उन्हें अपार खुशी मिल रही है. उन्होंने देश के सभी लोगों को छठ व्रत की बधाई भी दी.

*एसपी ने उठाया दउरा :* लातेहार एसपी अंजनी अंजन अपने माथे पर पारंपरिक रीति रिवाज के अनुसार दउरा उठाकर औरंगा नदी के छठ घाट तक पहुंचे. जहां पूजा अर्चना के बाद भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया गया. एसपी ने बताया कि उनके घर हर वर्ष छठ पर्व होता है. पिछले कई वर्षों से वह अपने घर के छठ व्रती के दउरा को अपने सिर पर उठा कर नदी के घाट तक ले जाते हैं.

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