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चंदवा के टोरी जंक्शन स्टेशन पर यात्री जान जोखिम में डालकर करते हैं यात्रा  ।  टोरी जंक्शन बना कोयला जंक्शन : रवि डे

चंदवा के टोरी जंक्शन स्टेशन पर यात्री जान जोखिम में डालकर करते हैं यात्रा

 

टोरी जंक्शन बना कोयला जंक्शन : रवि डे

 

चंदवा संवाददाता मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट

 

चंदवा। चंदवा टोरी जंक्शन पर कभी भी कोई भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। दुर्घटना रेलवे और स्थानीय रेल प्रशासन की वजह से हो सकता है। टोरी जंक्शन से रेलवे को प्रतिदिन लगभग करोड़ों रुपए रेवेन्यू प्राप्त होता है, इसके बावजूद भी टोरी जंक्शन सिर्फ कोयला जंक्शन बनकर रह गया है। यहां पर नागरिक सुविधा और सुरक्षा का कोई भी इंतजाम नहीं है। रेलवे ओवर ब्रिज का शिलान्यास 1 वर्ष पूर्व होने के बाद भी अभी तक ओवर ब्रिज नहीं बनना दुर्भाग्यपूर्ण है। समाज सेवी और राजनीतिक दल के द्वारा बार-बार इस मुद्दे पर आवाज उठाने के बावजूद रेलवे को कोई फर्क नही पड़ता यूँ कहे की इससे कोई लेना-देना नहीं है। रेलवे को सिर्फ कोयला ढोने से मतलब रह गया है। टोरी जंक्शन पर सिर्फ एक फुट ओवर ब्रिज है वह भी सेंटर में और सिर्फ प्लेटफार्म पर आने जाने के लिए है। टोरी जंक्शन के दक्षिण में मुख्य टाउन और साप्ताहिक बुध बाजार लगता है। टोरी जंक्शन के उत्तर में सप्ताहिक हाट शुक्र बाजार लगता है जहां हजारों की संख्या में नागरिकों का आना जाना होता है। एक भी फुट ओवर ब्रिज नहीं है, जो नागरिकों को आने जाने के लिए इस पार से उस पार हो सके। फुटओवर ब्रिज नहीं होने के कारण स्थानीय नागरिकों के साथ साथ यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

टोरी जंक्शन में 10 रेलवे लाइन है, इसके बावजूद भी एक भी फुटओवर ब्रिज का नहीं होना रेलवे की घोर लापरवाही को दर्शाता है।

रेलवे क्रॉसिंग कभी-कभी आधा घंटा तो कभी एक घंटा बंद रहता है । ओवरब्रिज नहीं होने के कारण भी स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को मजबूरी में रेल पटरी के अंदर से आना-जाना करते हैं , रेलवे प्रशासन की ओर से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी प्रकार के गार्ड की व्यवस्था नहीं की गई है। आम नागरिकों को पटरी के अंदर से जाने से रोका जा सके। इस कारण कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है । स्थानीय नागरिकों ने बताया कि फुटओवर ब्रिज नहीं होने के कारण और रेलवे ब्रिज नहीं होने के कारण हम लोगों को मजबूरी में जान जोखिम में डालकर पटरी क्रॉस करके जाना पड़ता है, अगर फुटओवर ब्रिज या फिर ओवरब्रिज बन होता तो हम लोग उससे आना-जाना करते पर यह दुर्भाग्य की बात है, कि करोड़ों रुपय रेवेन्यू देने के बाद भी टोरी जंक्शन आज की उपेक्षा का शिकार है। समाज सेवी रवि कुमार डे लगातार रेल प्रसाशन के खिलाफ धरना प्रदर्शन और कई सालों से करते आ रहे है। परंतु रेल प्रसाशन कोयला ढोने में लगी रहती है। और डीआरएम देख कर चले जाते है।

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