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गारू प्रखंड में हाथी का दांत साबित हो रहा है सोलर जल मीनार

*गारू प्रखंड में हाथी का दांत साबित हो रहा है सोलर जल मीनार*

 

गारू संवाददाता रामदयाल यादव की रिपोर्ट

गारू

 

प्रखंड क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों में 14 वें वित्त आयोग की राशि से निर्मित सोलर जलमीनार इन दिनों खराब पड़ी हुई है. खराब जलमीनार लोगों के लिए हाथी दाँत साबित हो रहा है. प्रखंड के मायापुर पंचायत के रामसेली ग्राम, पहाड़कोचा एवं हेठडीह आदि स्थानों पर लगी जलमीनार बीते कई माह से खराब है. इस कारण लोगों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वही जोशफ ब्रिजिया,सोहन ब्रिजिया,निर्मली देवी ने बताया कि इन दिनो भारी बारिश होने के कारण नदी में गंदे पानी का बहाव हो रहा है,जिसे मंगरा व हेठडीह के आदिम जनजाति समुदाय के लोग पानी को पीने के लिये मजबूर है।जहा कबरी ग्राम के ग्रामीण प्रकाश मिंज,धर्मेन्द्र उरांव, सुशील खेस, समेत कई लोगों ने बताया कि पेयजल की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने 14 वें वित्त आयोग व पीएचडी विभाग की राशि से वर्षो यह जलमीनार लगाया गया था. लेकिन बीते वर्षो से जलमीनार खराब पड़ी है. पंचायत प्रशासन या संबंधित विभाग इसकी सुधि नहीं ले रहा है. जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि शुद्ध पीने के पानी का एकमात्र साधन उक्त सोलर जलमीनार ही है. इसके खराब हो जाने से करीब 50 घर के लोग दूर से पानी लाते हैं. जहा बरसात के दिनों में नदी नालों का पानी पाकर मलेरिया जैसे बीमारी से ग्रसित हो रहे है ।लेकिन जल मीनार खराब होने से लोगों को भारी फजीहत हो रही है.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जल मीनार लगाने में घोर अनियमितता बरती गई है. अनियमितता का आलम यह है कि निर्माण के साथ ही पाइप में लीकेज होना, नल में खराबी आ जाना और सोलर प्लेट का काम करना बंद कर देना आदि समस्याएं उत्पन्न हो गई है. यहां तक कि जलमीनार स्थल में योजना का बोर्ड तक नहीं लगाया गया है. जलमीनार के फाउंडेशन में भी मानकों की अनदेखी की गई है. निर्माण के दौरान भी ग्रामीणों ने इसपर सवाल उठाया था. लेकिन ग्रामीणों की बातों को अनदेखी कर दी गयी, जलमीनार के बगल में शोकपिट का निर्माण भी नही किया गया है.इससे टंकी गिरने की संभावना है. ग्रामीणों ने बताया कि मुखिया और पंचायत सचिव से कई बार इसकी शिकायत की गई लेकिन इसकी शुद्धि कोई नही ली, बताया कि अधिक मुनाफा अर्जित करने के उद्देश्य से जलमीनार की गुणवत्ता के साथ समझौता किया गया है. प्रखंड के अन्य गांवों में बनी जलमीनारों की भी समस्या ऐसी ही है।

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