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झारखंड का पहला मनरेगा पार्क, जहां महीने में 20 दिन ग्रामीणों को मिलता है रोजगार

रांची. झारखंड का ईटा- चिन्द्री गांव मनरेगा (MNREGA) की योजनाओं का केंद्र बिंदु बन गया है. यहां आपको मनरेगा की दस से ज्यादा योजनाएं धरातल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराती दिख जाएंगी. सरकार ने इस गांव को मनरेगा पार्क घोषित कर दिया है. यहां ग्रामीणों को महीने के 20 दिन रोजगार की गारंटी है.

आपने फ्लावर पार्क या फूड पार्क के बारे में जरूर सुना और देखा होगा. लेकिन बात अगर मनरेगा पार्क की करें, तो शायद आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे. एक ऐसा पार्क जहां लोगों के रोजगार का सृजन हो रहा है. एक ऐसा पार्क जहां सरकार की योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं. एक ऐसा पार्क जो ग्रामीणों के वर्तमान से लेकर भविष्य को संवारने में लगा है.

शायद यही वजह है कि सरकार ने बहुत सोच समझ कर इसका नाम मनरेगा पार्क रखा है. आपको जानकर ये हैरानी होगी कि इस पार्क में स्थानीय ग्रामीणों को महीने का 20 दिन रोजगार मिल ही जाता है. मतलब यहां के ग्रामीणों को रोजगार के लिये कहीं भटकना नहीं पड़ता है.

झारखंड का पहला मनरेगा पार्क रांची जिले के बेड़ो प्रखण्ड अंतर्गत ईटा- चिन्द्री गांव में बनाया गया है. सरकार की दृढ़ इच्छा शक्ति और ग्रामीणों की मदद से मनरेगा की दस से ज्यादा योजनाएं आपको यहां दिख जाएंगी. सिंचाई कूप, डोभा, दीदी बाड़ी, वर्मी कम्बोस्ट, आम बागवानी, टीसीबी सहित अन्य मनरेगा से संचालित योजनाएं यहां धरातल पर उतर चुकी हैं.

मनरेगा से रोजगार पाने वाले बिरसा और कारण उरांव बताते हैं कि पहले तन ढकने के लि पैसे नहीं होते थे. परिवार चलाने में काफी दिक्कत होती थी. एक- एक पैसे के लिये दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ता था. आज समय बदल गया है और अब तो घर में मोटरसाइकिल आ गई है.

ईटा- चिन्द्री गांव में आपको जहां तक नजर जाए मनरेगा की योजनाएं ही दिखेंगी. बेड़ो बीडीओ प्रवीण कुमार के अनुसार 40 एकड़ भूमि पर मनरेगा की करीब 10 योजनाएं ग्रामीणों की मेहनत और सरकार की सोच का उदाहरण पेश कर रही है. इसे पर्यावरण के विकास और ग्रामीणों के आर्थिक- सामाजिक विकास के साथ जोड़ कर भी देखा जा रहा है. ईटा- चिन्द्री में मिली सफलता के बाद अब बेड़ो के ही लमकाना गांव में मनरेगा पार्क विकसित करने पर काम शुरू कर दिया गया है.

मनरेगा में लूट की खबरें हमेशा ही सामने आती रहती हैं. योजना के नाम पर खानापूर्ति मनरेगा को कलंकित भी करता रहा है. ऐसे में मनरेगा पार्क सचमुच में ग्रामीणों के बीच रोजगार की आस को जगाने और योजनाओं के सहारे भविष्य को संवारने की प्रेरणा देता है. अभी तो ये शुरुआत है और अगर सरकार मनरेगा पार्क को पूरे राज्य में स्थापित कर पाती है, तो ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव जरूर देखने को मिल सकता है.

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