बंगाल की राजनीतिक हिंसा पर भाजपा एकजुट, कहा बंगाल में अराजकता का माहौल, राष्ट्रपति शासन ही अब अंतिम विकल्प।

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■बोले रघुवर- पूरी भाजपा बंगाल के कार्यकर्ताओं के साथ, माँ, माटी, मानुष की रक्षा करें ममता सरकार।

जमशेदपुर। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के साथ ही सियासी हिंसा का दौर जारी हो गया है। परिणाम आने और टीएमसी की पुनः सत्ता में आने साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। लगातार भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या, उनके घरों पर पथराव, दुकानों की लूट, महिला कार्यकर्ताओं के साथ दुष्कर्म जैसे घृणित कार्य से देशभर के भाजपा कार्यकर्ता आक्रोशित हैं। बुधवार को बंगाल में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के संग जमशेदपुर महानगर के कार्यकर्ताओं ने एकदिवसीय धरना प्रदर्शन कर बंगाल के कार्यकर्ताओं का समर्थन किया। बुधवार को कार्यकर्ताओं ने कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर घरों पर बांह में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रकट किया। इस अवसर पर सभी ने एक स्वर में बंगाल में संरक्षण प्राप्त उपद्रवी कार्यकर्ताओं पर कड़ी करवाई और हिंसक घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाने की मांग की। इस दौरान जमशेदपुर में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिनेशानंद गोस्वामी, सांसद विद्युत वरण महतो, पूर्व विधायक मेनका सरदार, जिलाध्यक्ष गुँजन यादव, प्रदेश मंत्री रीता मिश्रा, प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी समेत कई नेताओं ने राजनीतिक हिंसा पर विरोध दर्ज कराया।

घटना के विरोध में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने एग्रिको स्थित आवास पर धरना दिया। धरना देने के क्रम में उन्होंने कहा कि बंगाल में चुनाव के बाद बर्बर हिंसा की घटनाएं उद्वेलित करती है। चुनाव लोकतंत्र का उत्सव होते हैं, लेकिन बंगाल में चुनाव के पहले हिंसा, आगजनी, बमबारी, तोडफ़ोड़, चुनाव के दौरान भी उन्हीं हिंसक घटनाओं का दोहराव और चुनाव के बाद भाजपा के दर्जन भर कार्यकर्ताओं की हत्या, दो महिला कार्यकर्ताओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म, पार्टी कार्यालयों पर हमले तथा आगजनी की घटनाओं ने हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इन घटनाओं से उत्पन्न पीड़ा तब और टीसती है, जब समूचा विपक्ष नपुंसक चुप्पी ओढ़े दिखाई देता है। मोमबत्ती गैंग बिल में घुस जाता है और अवार्ड वापसी गिरोह ओझल हो जाता है। इन्हें मालूम है कि दुष्कर्म भाजपा की महिलाओं के साथ नहीं लोकतंत्र के साथ हुआ है, हत्या जनतंत्र की हुई है। और जम्हूरियत शर्मशार हुई है।

संविधान और लोकतंत्र की दुहाई देने वाले पाखंडी टी.एम.सी. वालों को यह पता ही नहीं है कि भाजपा संघर्ष तथा हमले को झेलते हुए ही यहां तक पहुंची है और बंगाल की लड़ाई भी वह लोकतांत्रिक-संवैधानिक तरीके से लडऩे में समर्थ है। भाजपा तीन सीटों से 80 तक पहुंची है और वह भी विषम परिस्थिति में लड़ी थी। शासन, प्रशासन, गुंडे-मवाली और सभी विपक्षी एक साथ थे। लेकिन क्या लोकतंत्र पराजित दल के लोगों का कत्लेआम जायज है। क्या देश में कभी भी कहीं भी ऐसा हुआ है। उन्होंने कहा कि हम अपने कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़े हैं। ममता जी आपने संविधान की जो शपथ ली है, उसका पालन करें। थोड़ी मानवता दिखाइए। माँ, माटी, मानुष की रक्षा कीजिये।

भाजपा महानगर अध्यक्ष गुँजन यादव ने अपने सीतारामडेरा स्थित आवास पर धरना दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के नेतृत्व में भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ता एकजुट होकर बंगाल के कार्यकर्ताओं के साथ खड़े है। राजनीतिक लड़ाई विचारधारा व सिद्धान्तों की होती है परंतु बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ता शक्ति का दुरूपयोग कर भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं। लगातार हो रही हिंसक घटनाओं ने साबित कर दिया है कि यह प्रायोजित हिंसा है। अगर ममता बनर्जी की दिलचस्पी होती तो चुनाव के बाद हुए हिंसा को रोक सकती थीं। बंगाल में खेला होबे के बाद इतना खुलकर खून-खराबा नहीं होता और न ही रक्तरंजित बंगाल यूँ कलंकित हो रहा होता। उन्होंने भारत सरकार से बंगाल की हिंसक घटनाओं पर संज्ञान लेकर कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है।

इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष ब्रह्मदेव नारायण शर्मा, देवेंद्र सिंह, अभय सिंह, बिनोद सिंह, चंद्रशेखर मिश्रा, राजकुमार श्रीवास्तव, नंदजी प्रसाद, दिनेश कुमार, राजकुमार सिंह, कुलवंत सिंह बंटी, राजेश शुक्ल, भरत सिंह, विकास सिंह समेत जिला उपाध्यक्ष सुधांशु ओझा, संजीव सिन्हा, बारी मुर्मू, महामंत्री अनिल मोदी, राकेश सिंह, पुष्पा तिर्की, जितेंद्र राय, मंजीत सिंह, नीलू मछुआ, पप्पू सिंह, मनोज राम, राजीव सिंह, बोलटू सरकार, प्रेम झा, नारायण पोद्दार, कौस्तव रॉय, मणि मोहंती, बिनोद कुमार सिंह, ज्ञान प्रकाश, राकेश बाबू, भाजयुमो जिलाध्यक्ष अमित अग्रवाल, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष धर्मेंद्र प्रसाद, किसान मोर्चा अध्यक्ष मुचीराम बाउरी, महिला मोर्चा अध्यक्ष ज्योति अधिकारी, अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष मोहम्मद निसार, अनुसूचित जाति मोर्चा अध्यक्ष अजीत कालिंदी, अनुसूचित जनजाति मोर्चा अध्यक्ष बीनानंद सिरका समेत महानगर के सभी मंडल अध्यक्ष, मंडल पदाधिकारी व सैकड़ों अन्य कार्यकर्ता शामिल हुए।