द्वितीय निशुल्क पुस्तक वितरण मेला 2020″सर्कस मैदान

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गिरिडिह में प्रातः 10:30 बजे से साइन 5:30 तक आयोजित किया गया।

मेले में हज़ारो की संख्या में पाठक व पुस्तक प्रेमी आये। लगभग 17 हज़ार टाइटल्स वितरित किये गए।

मेले के लिए प्रथम शिक्षा मंत्री झारखण्ड श्री चन्द्ररमोहन प्रसाद तो पूर्व जेपीएसी सदस्य व रजिस्ट्रार BVU ने प्रशंशा जहिरकरते हुए इसे गिरिडिह के लिए सर्वोत्तम सोच बतलाया।

आयोजक संस्था के सचिव श्री रितेश चन्द्र ने कहा कि हमारी संकल्पना है जिले में प्रतिवर्ष शिक्षण सनस्थानों एवं कोचिंग सनस्तगानो शिक्षा विदो के सहयोग से यह मेला आयोजित करने की परंपरा विकसित हो ताकि कोई छात्र अर्थाभाव में उत्कृष्ट पुस्तको से दूर न रह सके

मात्र 10 रुपये की सहयोग पर मनचाही पुस्तक प्राप्त करें। प्राथमिक से स्नातकोत्तर एवं इंटर लेवल से ग्रेजुएशन लेवल के सभी प्रतियोगिताओं के लिए चुनिंदा पुस्तके,साल्व पेपर गेस पेपर, साथ है लाँ के स्टडी मेट्रिरीयल्स। रिटेल सेल्स पर भी भारत सरकार की बेहतर मैटेरियल्स भी उपलब्ध है

हमारे इस संग्रह वितरण के प्रयास को समृद्ध करने में चिल्ड्रेंश बुक्स अलकापुरी के सत्यप्रकास सिंह, शारदा भवन के मनीष कुमार उर्फ मिंटू तो आनन्दम ट्यूटोरियल्स के संस्तगापक आनंदम जी ने विविध प्रतियोगी पुस्तके भी उपलब्ध कराई तो सारथी संस्था की ओर से स्किल डेवलपमेंट की पुस्तकें एवं सीडी उपलध कराई। तो बीएनएस डीएवी के शिक्षक मनीष कुमार सिन्हा,मनीषा सहा जी ने तो डीईओ कार्यालय के ओमप्रकाश जी ने पुस्तको का अनूठा संकलन दिया।

मेले को सफल बनाने मुख्यरूप से राजकुमार चौबे, योगेंद्र प्रसाद वर्मा,अधिवक्ता गीतेश चन्द्र,दीनानाथ चौबे,नीरज सुमन, अमित जयसवाल, सोनाली, काजल कुमारी,अरविंद कुमार आरसी कुमार बास्के, जैसे स्वयंसेवको ने मुख्य भूमिका निभाई।

हैल्प फाउंडेशन यह संकल्पना सँजोये है कि भविष्य में प्रत्येक वर्ष ऐसे निशुल्क व वृहत्तर मेले का स्वतः आयोजन होने लगे ताकि कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों सहयोग मिल सके।

ज्ञात हो कोविडं काल मे भी संस्था ने लोक सहयोग से कई सराहनीय हस्तक्षेप किये जो अन्य संस्थाओं के लिए भी आदर्श है। संस्स्था ने प्रवासी पैदल मज़दूरों के लिए कुक फूड डिस्ट्रीव्यूशन से टिफिन पैक तक तो 3000 मास्क का डिस्ट्रीब्यूशन, धूम्रपान व कोविडं पर आन लाइन प्रतियोगिता का आयोजन व पिछले माह 14 तारीख को प्रथम पुस्तक वितरण मेला किया था। यह मेला उसी श्रंखला की दूसरी कड़ी है।

डिम्पल और चन्दन की रिपोर्ट