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 चंदवा पूर्वी बागवानी के नाम पर मनरेगा में बेईमानी लाभूक भी परेशान बिचौलिया अधिकारी मालामाल

मनरेगा में चंदवा प्रखंड में भारी लूट बिचोलिया मालामाल स्थानीय अधिकारी की भी विशेष मिली भगत

मुकेश सिंह की रिपोर्ट

 

चंदवा पूर्वी बागवानी के नाम पर मनरेगा में बेईमानी लाभूक भी परेशान बिचौलिया अधिकारी मालामाल

 

 

 

चंदवा। चंदवा प्रखंड में लगभग पांच सौ से छह सौ बागवानी बताया जाता है जिसमें चंदवा पूर्वी के हड़गढ़वा ग्राम में जीवनमशीह कच्छप आम बागवानी को देखा गया और लाभुक से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि 1 एकड़ में आम बागवानी 1 साल पूर्व किया गया था। परंतु अभी के समय में हमारे पास महज 20 से 30 ही आम के पौधे रह गए हैं रोजगार सेवक और स्वयंसेवक और बीडीओ के द्वारा कहा गया था कि हमको और पौधा दिया जाएगा परंतु पौधे मर जाने के बाद अभी तक नहीं मिला जीवनमशीह कहते हैं कि हमारे पास सिंचाई की सुविधा नहीं है जिससे हम पौधे को नहीं बचा सके। वही ब्लॉक के तरफ से मेंटेनेंस के नाम पर किसी तरह का कोई राशि नहीं दिया जाता है

। हम मजदूरी करके कितना पौधा को बचा पाएंगे देखा गया कि जीवन मशीह उसी आम बागवानी खेत में ही बादाम के खेती किए है। हम लोगों ने पूछा की इसमें खेती क्योंकि है तो उन्होंने बताया कि क्या करें सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण हैंड पम्प से पटा कर खेती किए हैं 1 एकड़ खेत में 112 पौधे लगाने की सरकार के यहां से योजना है परंतु किसी भी बागवानी में 112 पौधे तो लगे ही नहीं बचने की बात तो बेईमानी होगी यह योजना तीन लाख चौहत्तर हजार (374000) रुपए की है परंतु योजना में लूट ही लूट दिखाई दे रही है कई जगह तो मालूम पड़ता है कि 10 से 12 पौधे ही बचे हैं और उसमें हर महीने या हर हफ्ते 10 से ₹15 हजार की निकासी की जाती है और पैसे की बंदरबांट की जाती है सरकार योजना तो बिल्कुल सही लाती है पर धरातल पर आते आते शून्य दिखाई पड़ती है ऐसे कई मनरेगा योजना को देखने को मिलेगा। चंदवा प्रखंड में आम बागवानी के नाम पर पैसे की बंदरबांट की जा रही है बिचोलिया और पदाधिकारी मिले हुए हैं धरातल पर कुछ भी नहीं है। यू कहे तो मनरेगा एक ऐसी योजना बन कर रह गई है बिजोलिया और पदाधिकारी मालामाल होते दिखाई देते हैं और काम के नाम पर बेईमानी साबित होता दिखाई दे रहा है। वही जीवन मसीही के आम बागवानी में लगभग ₹98 हजार की निकासी एक वर्ष में कर ली गई है। आगे मदद की आस में परेशान और आधा हताश है।

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